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उद्यान विभाग शिवपुरी में वर्षों से जमे अधिकारियों पर सवाल, किसानों में बढ़ रहा आक्रोश

  उद्यान विभाग शिवपुरी में वर्षों से जमे अधिकारियों पर सवाल, किसानों में बढ़ रहा आक्रोश India aaj tak.com Editor-in-Chief : Vinod Vikat Mob ...

 उद्यान विभाग शिवपुरी में वर्षों से जमे अधिकारियों पर सवाल, किसानों में बढ़ रहा आक्रोश

India aaj tak.com

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob : 9977708976

Date : 28/05/2026




शिवपुरी / शिवपुरी का उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग अब किसानों के बीच चर्चा और सवालों का केंद्र बनता जा रहा है। विभाग द्वारा ड्रिप इरिगेशन, फलदार पौधे, पॉलीहाउस, नर्सरी और खाद्य प्रसंस्करण जैसी योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये की सब्सिडी और अनुदान संचालित किए जाते हैं, लेकिन अब इन योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

फोटो और विभागीय दस्तावेजों में जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नाम दिखाई दे रहे हैं, उनमें मेघराज आदिवासी, कुंवर सिंह, विनोद पेवा, नरेंद्र सिंह तोमर, राजपाल सिंह, अशोक यादव, ब्रजमोहन बंसल, दिनेश पाठक, गुमान सिंह जाटव सहित कई अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इनमें से कुछ अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से विभाग में प्रभावशाली भूमिका में बने हुए हैं।

किसानों का आरोप है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पूरी पारदर्शिता से नहीं पहुंच पा रहा। कई ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय प्रक्रिया में कथित रूप से सिफारिश, देरी और चयन में पक्षपात जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सूत्रों के अनुसार, ड्रिप सिंचाई, पौध वितरण और पॉलीहाउस योजनाओं में फाइलों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर होने की शिकायतें समय-समय पर उठती रही हैं। अब किसानों और सामाजिक संगठनों ने पूरे विभाग की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है।

मामला अब जिला प्रशासन से लेकर भोपाल तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। जिले के कलेक्टर Arpit Verma, मुख्यमंत्री Mohan Yadav, ग्वालियर कमिश्नर और जिले के जनप्रतिनिधियों से मांग की जा रही है कि वे उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराएं और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करें।

अब बड़ा सवाल यही है कि किसानों के नाम पर चल रही योजनाओं का पूरा लाभ वास्तव में खेत तक पहुंच रहा है या फिर सरकारी दावों और कागजी आंकड़ों में ही सीमित रह गया है। शिवपुरी में यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में प्रशासनिक हलकों में बड़ी हलचल मच सकती है।

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