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उद्यान विभाग शिवपुरी में वर्षों से जमे अधिकारियों पर उठे सवाल, योजनाओं के नाम पर खेल या किसानों के साथ बड़ा अन्याय?

  उद्यान विभाग शिवपुरी में वर्षों से जमे अधिकारियों पर उठे सवाल, योजनाओं के नाम पर खेल या किसानों के साथ बड़ा अन्याय? India aaj tak.com Edit...

 उद्यान विभाग शिवपुरी में वर्षों से जमे अधिकारियों पर उठे सवाल, योजनाओं के नाम पर खेल या किसानों के साथ बड़ा अन्याय?

India aaj tak.com

Editor-in-Chief : Vinod Vikat

Mob : 9977708976

Date : 28/05/2026



शिवपुरी / शिवपुरी जिले का उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में आता दिखाई दे रहा है। किसानों को फल, फूल, सब्जी, ड्रिप इरिगेशन, पॉलीहाउस, नर्सरी और विभिन्न अनुदान योजनाओं का लाभ दिलाने वाला यह विभाग अब कथित अनियमितताओं और लंबे समय से जमे अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं में है।

जिले में किसानों के बीच बांटे जा रहे विभागीय पुस्तिकाओं और योजनाओं की जानकारी के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर करोड़ों रुपये की योजनाओं का वास्तविक लाभ कितने किसानों तक पहुंचा और कितना सिर्फ कागजों में सीमित रह गया?

सूत्रों का दावा है कि विभाग में कुछ अधिकारी वर्षों से एक ही जिले में जमे हुए हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि योजनाओं में चयन, सब्सिडी स्वीकृति, पौध वितरण, सिंचाई उपकरणों की स्वीकृति और पॉलीहाउस जैसी महंगी योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। किसानों के बीच चर्चा है कि बिना “सिफारिश” और “सेटिंग” के कई योजनाओं का लाभ मिलना मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से यह शिकायतें भी सामने आ रही हैं कि कई किसानों को योजना की पूरी जानकारी तक नहीं दी जाती, जबकि विभागीय रिकॉर्ड में लक्ष्य पूर्ण दिखा दिए जाते हैं। कुछ किसानों का आरोप है कि निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।

अब जिले के किसान और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि पूरे उद्यान विभाग की योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। खासतौर पर ड्रिप इरिगेशन, पॉलीहाउस, फलदार पौध वितरण, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और अनुदान वितरण की फाइलों की जांच की मांग तेज हो रही है।

मामला अब जिला प्रशासन से लेकर भोपाल तक चर्चा का विषय बनता दिखाई दे रहा है। जिले के कलेक्टर Arpit Verma, मुख्यमंत्री Mohan Yadav, ग्वालियर कमिश्नर तथा जिले के जनप्रतिनिधियों से मांग की जा रही है कि वे विभाग की कार्यप्रणाली पर तत्काल ध्यान दें और यदि कहीं गड़बड़ी मिली है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें।

बताया जा रहा है कि विभाग के भीतर वर्षों से जमे कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों का इतना प्रभाव है कि किसान खुलकर शिकायत करने से भी डरते हैं। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बार-बार शिकायतों के बावजूद विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल क्यों नहीं हो रहा?

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या शिवपुरी उद्यान विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कोई बड़ी जांच बैठती है या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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