💐 संपादकीय प्रहार "जब पानी नहीं था, तब जिम्मेदार कहां थे? अब टैंकरों पर फोटो लगाकर वाहवाही क्यों?" शिवपुरी की जनता पूछ रही है कि...
💐 संपादकीय प्रहार
"जब पानी नहीं था, तब जिम्मेदार कहां थे? अब टैंकरों पर फोटो लगाकर वाहवाही क्यों?"
शिवपुरी की जनता पूछ रही है कि यदि सब कुछ ठीक था तो शहर पानी के संकट में क्यों डूबा? और यदि हालात खराब थे तो समय रहते सुधार क्यों नहीं किया गया? करोड़ों की योजनाओं, सैकड़ों ट्यूबवेलों और बड़े-बड़े दावों के बावजूद जब लोगों को टैंकरों के भरोसे रहना पड़ रहा है, तो यह किसी उपलब्धि का नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है।
आज टैंकरों पर नेताओं के बैनर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जनता यह भी जानना चाहती है कि जिन तालाबों पर कब्जे हुए, जिन जलस्रोतों का विनाश हुआ और जिस जल प्रबंधन की अनदेखी हुई, उसके लिए जवाबदेह कौन है?
"प्यासी जनता, मौन प्रशासन और बैनर वाले टैंकर: क्या यही है 200 करोड़ की जल योजना का सच?"
जनता का सवाल
"पानी आने पर श्रेय लेने वालों की कमी नहीं, लेकिन पानी जाने पर जिम्मेदारी कौन लेगा?"
Indiaaajtak.in
Editor-in-Chief: Vinod Vikat
30 मई 2026


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