Page Nav

HIDE

Breaking News:

latest

Total Pageviews

पानी पर राजनीति या राहत की कोशिश? शिवपुरी की सड़कों पर दौड़े नेताओं के बैनर वाले टैंकर, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन?

पानी पर राजनीति या राहत की कोशिश? शिवपुरी की सड़कों पर दौड़े नेताओं के बैनर वाले टैंकर, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन? उपशीर्षक: जब करोड़ो...


पानी पर राजनीति या राहत की कोशिश? शिवपुरी की सड़कों पर दौड़े नेताओं के बैनर वाले टैंकर, जनता पूछ रही—आखिर जिम्मेदार कौन?

उपशीर्षक:

जब करोड़ों की जल योजनाएं प्यास नहीं बुझा सकीं, तब टैंकर बने राजनीति का नया हथियार; प्रशासन, नगर पालिका और जनप्रतिनिधि सवालों के घेरे में।

Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief: Vinod Vikat

Mob.: 09977708976

दिनांक: 30 मई 2026



शिवपुरी। भीषण जल संकट से जूझ रहे शिवपुरी शहर में अब पानी सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। शनिवार को शहर की सड़कों पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा नेताओं के फोटो व बैनर लगे पानी के टैंकर दौड़ते नजर आए। टैंकरों से पानी वितरण की तस्वीरें सामने आते ही शहर में एक नई बहस छिड़ गई है।

जनता का सवाल है कि यदि टैंकरों से पानी पहुंचाया जा सकता है, तो फिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर को ऐसी नौबत तक पहुंचने क्यों दिया गया? क्या यह राहत का प्रयास है या फिर प्रशासनिक विफलताओं पर पर्दा डालने की कोशिश?

शहर में कई दिनों से लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। मोहल्लों में खाली बर्तन और सूखे नल प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहे हैं। ऐसे समय में नेताओं के बैनर वाले टैंकरों का मैदान में उतरना राजनीतिक संदेश तो दे रहा है, लेकिन साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गर्मी हर साल पड़ती है, तब जल संकट से निपटने की पूर्व तैयारी क्यों नहीं हुई? मोटरें समय पर क्यों नहीं बदली गईं? जल स्रोतों का संरक्षण क्यों नहीं हुआ? और आखिर किस अधिकारी ने ऐसी स्थिति बनने दी कि आज शहर फिर टैंकरों पर निर्भर हो गया?

सिंध जलावर्धन योजना पर वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च हुए। नगर पालिका के पास सैकड़ों ट्यूबवेल हैं। प्रशासन ने गर्मी शुरू होने से पहले जल सुनवाई अभियान भी चलाया था। इसके बावजूद हालात इतने बिगड़ गए कि अब राजनीतिक दलों और नेताओं को खुद पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।

शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि टैंकर भेजना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। असली जरूरत उन कारणों की जांच करने की है, जिनकी वजह से शिवपुरी हर साल जल संकट का शिकार बनता है।

अब जनता की निगाहें जिला प्रशासन, नगर पालिका और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ पानी का नहीं है, बल्कि जवाबदेही का भी है। आखिर करोड़ों की योजनाओं और बड़े-बड़े दावों के बाद भी शिवपुरी को टैंकर युग में धकेलने वाला जिम्मेदार कौन है?

बड़ा सवाल:

क्या टैंकरों की राजनीति से प्यास बुझेगी, या फिर प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी?

शिवपुरी की जनता अब पानी के साथ-साथ जवाब भी मांग रही है।

No comments

Contact Form

Name

Email *

Message *

Latest Articles