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शिवपुरी प्यासा, अफसरों की पूरी फौज मैदान में; सवाल—जब शहर बूंद-बूंद को तरस रहा था तब जिम्मेदार कहाँ थे?

Indiaaajtak.in Editor-in-Chief: Vinod Vikat Mob.: 09977708976 दिनांक: 30 मई 2026 शिवपुरी प्यासा, अफसरों की पूरी फौज मैदान में; सवाल—जब शहर ब...


Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief: Vinod Vikat

Mob.: 09977708976

दिनांक: 30 मई 2026

शिवपुरी प्यासा, अफसरों की पूरी फौज मैदान में; सवाल—जब शहर बूंद-बूंद को तरस रहा था तब जिम्मेदार कहाँ थे?

जल संकट ने खोली सिस्टम की पोल, अब 39 वार्डों पर अफसरों की निगरानी; जनता पूछ रही—पहले क्यों नहीं जागा प्रशासन?


शिवपुरी। मड़ीखेड़ा पंपिंग स्टेशन की मोटर खराब होने से उत्पन्न जल संकट ने शिवपुरी की पेयजल व्यवस्था की पूरी हकीकत सामने ला दी है। कई वार्डों में लोग पानी के लिए परेशान रहे, टैंकरों का इंतजार करते रहे और प्रशासन हालात बिगड़ने के बाद हरकत में आया।

अब कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अपर कलेक्टर दिनेश चन्द्र शुक्ला को पेयजल व्यवस्था का नोडल अधिकारी नियुक्त कर शहर के सभी वार्डों की निगरानी के लिए अधिकारियों की लंबी सूची जारी की है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इतनी बड़ी प्रशासनिक मशीनरी पहले से मौजूद थी तो शहर को जल संकट झेलने की नौबत क्यों आई?

प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार वार्ड 1-2 की जिम्मेदारी संयुक्त कलेक्टर जे.पी. गुप्ता, वार्ड 3-4 की एसडीएम आनंद सिंह राजावत, वार्ड 5-6 की प्रभारी डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़, वार्ड 7-8 की प्रभारी डिप्टी कलेक्टर मोतीलाल अहिरवार, वार्ड 9-10 की प्रभारी डिप्टी कलेक्टर अजय शर्मा को सौंपी गई है।

इसी प्रकार वार्ड 11-12 में डीपीएम डीपीआईपी अरविन्द्र भार्गव, वार्ड 13-14 में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी डी.एस. जादौन, वार्ड 15-16 में जिला संयोजक आजाक महेश श्रीवास्तव, वार्ड 17-18 में ईई पीएचई शुभम अग्रवाल, वार्ड 19-20 में एसडीओ पीडब्ल्यूडी गौरव गुप्ता तथा वार्ड 21-22 में ईई जल संसाधन मोहित जैन को जिम्मेदारी दी गई है।

वार्ड 23-24 में ईई आरईएस जी.के. श्रीवास्तव, वार्ड 25-26 में ईई जल निगम जे.पी. गनोटे, वार्ड 27-28 में जिला खनिज अधिकारी राम सिंह उइके, वार्ड 29-30 में मुख्य नगरपालिका अधिकारी इशांक धाकड़, वार्ड 31-32 में उपसंचालक कृषि पी.एस. करोरिया, वार्ड 33-34 में जिला आपूर्ति अधिकारी तुलेश्वर कुर्रे और वार्ड 35-36 में सहायक यंत्री नगर पालिका सचिन चौहान को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वहीं वार्ड 37 में डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार, वार्ड 38 में तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण शर्मा और वार्ड 39 में प्रभारी तहसीलदार अनिल धाकड़ को पेयजल आपूर्ति की निगरानी का दायित्व दिया गया है।

सबसे बड़ा सवाल—इतने अधिकारी थे, फिर पानी क्यों नहीं था?

जनता पूछ रही है कि जब जे.पी. गुप्ता, आनंद सिंह राजावत, शिवदयाल धाकड़, मोतीलाल अहिरवार, अजय शर्मा, अरविन्द्र भार्गव, डी.एस. जादौन, महेश श्रीवास्तव, शुभम अग्रवाल, गौरव गुप्ता, मोहित जैन, जी.के. श्रीवास्तव, जे.पी. गनोटे, राम सिंह उइके, इशांक धाकड़, पी.एस. करोरिया, तुलेश्वर कुर्रे, सचिन चौहान, दफेदार सिंह सिकरवार, सिद्धार्थ भूषण शर्मा और अनिल धाकड़ जैसे वरिष्ठ अधिकारी अब निगरानी के लिए तैनात किए जा सकते हैं, तो संकट से पहले ऐसी निगरानी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?

जनता को पानी चाहिए, आदेश नहीं

शहरवासियों का कहना है कि आदेश, बैठकें और जिम्मेदारियां संकट के बाद तय की जा रही हैं। असली सवाल यह है कि जल संकट पैदा होने से पहले जिम्मेदार विभागों ने क्या तैयारी की थी? यदि समय रहते मोटरों, पाइपलाइन और वैकल्पिक जल स्रोतों की समीक्षा होती तो शायद शिवपुरी को इस भीषण जल संकट का सामना नहीं करना पड़ता।

फिलहाल प्रशासन ने पूरे शहर पर अफसरों की निगरानी बैठा दी है, लेकिन जनता की अदालत में फैसला अभी बाकी है। लोग जानना चाहते हैं कि जल संकट के लिए जवाबदेही किसकी तय होगी और क्या भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी, इसकी कोई ठोस गारंटी है?

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