शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग में बढ़ता विवाद! निलंबन, स्टे और अब रिश्वतखोरी के पुराने आरोपों ने बढ़ाई हलचल India Aaj Tak.com Editor-in-Chief: V...
शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग में बढ़ता विवाद!
निलंबन, स्टे और अब रिश्वतखोरी के पुराने आरोपों ने बढ़ाई हलचल
India Aaj Tak.com
Editor-in-Chief: Vinod Vikat
Mob: 9977708976
Date: 28/05/2026
शिवपुरी / शिवपुरी जिले का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों लगातार विवादों और आरोपों के घेरे में बना हुआ है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों में निलंबित किए गए प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय ऋषिश्वर के न्यायालय से स्टे लेकर दोबारा कुर्सी पर बैठने के बाद अब पुराने मामलों की भी चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों और विभागीय चर्चाओं के अनुसार, पूर्व में स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों द्वारा सीएमएचओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। आरोप यह भी लगाए जाते रहे हैं कि विभाग में कई कार्य बिना “लेन-देन” के नहीं होते थे और कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण में भी कथित रूप से मनमानी की जाती थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या न्यायिक रूप से सिद्ध होना स्पष्ट नहीं है, लेकिन विभाग के अंदर लंबे समय से असंतोष की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं।
CMHO पर कार्रवाई के बाद यह मामला अब केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर वर्षों से चली आ रही शिकायतों और अव्यवस्थाओं पर समय रहते कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
फोटो में दर्ज अधिकारियों के नाम भी अब चर्चाओं में हैं। इनमें डॉ. एस.पी. गुप्ता, डॉ. राजेश, डॉ. चेतन सिंह कुशवाह, डॉ. सैफी बानो, डॉ. अरुण शर्मा, डॉ. सविता सक्सेना, डॉ. विशाल बुंदेला और डॉ. महेंद्र कुशवाह जैसे अधिकारी लंबे समय से जिले में पदस्थ बताए जा रहे हैं। आरोप हैं कि कई अधिकारी फील्ड निरीक्षण के बजाय कार्यालयों तक सीमित हो चुके हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं।
शिवपुरी जिले के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी, दवाओं का अभाव, समय पर उपचार न मिलना और निरीक्षण व्यवस्था कमजोर होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
अब इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्वास्थ्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन, ग्वालियर संभाग के कमिश्नर और शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा की भूमिका पर भी लोगों की निगाहें टिक गई हैं। जिले की जनता और सामाजिक संगठनों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग में व्यापक जांच कराकर भ्रष्टाचार, लापरवाही और वर्षों से जमे अधिकारियों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए।
CMHO निलंबन, फिर स्टे और अब रिश्वतखोरी के पुराने आरोपों की चर्चाओं ने शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक भूचाल खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश स्तर पर और अधिक तूल पकड़ सकता है।

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