लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद भी कुर्सी पर कायम सुधीर मिश्रा! आखिर किसकी मेहरबानी से बचता रहा सिस्टम? India Aaj Tak.com Editor-in-Chi...
लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद भी कुर्सी पर कायम सुधीर मिश्रा!
आखिर किसकी मेहरबानी से बचता रहा सिस्टम?
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Editor-in-Chief: विनोद विकट | मोब.: 9977708976 | दिनांक: 28/05/2026
शिवपुरी / शिवपुरी जिले की नगर पालिका व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2019 में पिचौर नगर परिषद के तत्कालीन CMO रहे सुधीर मिश्रा को लोकायुक्त पुलिस ने 1 लाख 17 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। आरोप था कि निर्माण कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी करने के एवज में ठेकेदारों से मोटी रकम मांगी जा रही थी। शिवपुरी के टूरिस्ट विलेज होटल में हुई इस ट्रैप कार्रवाई ने उस समय पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है —
इतने बड़े लोकायुक्त ट्रैप के बाद भी सुधीर मिश्रा आज नगर पालिका शिवपुरी में राजस्व निरीक्षक (RI) और सहायक चार्ज अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कैसे जमे हुए हैं?
सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका में राजस्व वसूली, प्रशासनिक निगरानी और कई संवेदनशील कार्यों की जिम्मेदारी आज भी उन्हीं के पास बताई जा रही है। ऐसे में जनता पूछ रही है कि क्या लोकायुक्त की कार्रवाई केवल अखबारों की सुर्खियों तक सीमित थी?
लोकायुक्त ट्रैप का मामला क्या था?
11 जुलाई 2019 को ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सुधीर मिश्रा को 1.17 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि नगर परिषद के कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी करने के लिए रिश्वत मांगी जा रही थी। कार्रवाई के दौरान नकदी बरामद हुई और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
उस समय तस्वीरें सामने आई थीं जिनमें नोटों की गड्डियां, होटल में बैठी टीम और लोकायुक्त अधिकारियों की पूछताछ साफ दिखाई दे रही थी। पूरे मामले ने प्रदेश भर में सुर्खियां बटोरी थीं।
अब बड़ा सवाल — कार्रवाई कहां अटक गई?
जनता के बीच अब यह चर्चा तेज हो रही है कि यदि किसी अधिकारी को लोकायुक्त रंगेहाथ पकड़ती है, तो फिर वर्षों बाद भी वह महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर कैसे बना रहता है?
क्या विभागीय जांच पूरी हुई?
क्या निलंबन हुआ?
क्या शासन ने क्लीन चिट दे दी?
या फिर फाइलें सिस्टम के किसी अंधेरे कमरे में दबा दी गईं?
नगर पालिका के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सुधीर मिश्रा आज भी प्रभावशाली स्थिति में बने हुए हैं और कई प्रशासनिक मामलों में उनकी पकड़ कायम है। इससे आम नागरिकों और करदाताओं के बीच नाराजगी बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन विभाग से उठ रहे सवाल
अब लोगों की निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन विभाग और लोकायुक्त संगठन पर टिक गई हैं। जनता जानना चाहती है कि भ्रष्टाचार के इतने चर्चित मामले में आखिर अंतिम कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यदि लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद भी अधिकारी वर्षों तक कुर्सी पर बने रहें, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनता का सीधा सवाल
“क्या रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद भी सरकारी कुर्सी बच सकती है?”
“क्या सिस्टम में बड़े अधिकारियों का संरक्षण मिला हुआ है?”
“क्या आम कर्मचारी के लिए अलग कानून और रसूखदार अफसरों के लिए अलग व्यवस्था है?”
शिवपुरी में यह मामला अब फिर चर्चा में है और लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की दोबारा निष्पक्ष जांच हो, विभागीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं और यह बताया जाए कि लोकायुक्त ट्रैप के बाद आखिर क्या कार्रवाई हुई।

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