अफसरनामा 65 लोग घायल, लेकिन जिम्मेदार कौन? विनोद विकट शिवपुरी में आवारा कुत्तों के हमलों में दो दिनों के भीतर 65 से अधिक लोग घायल हो गए। म...
अफसरनामा
65 लोग घायल, लेकिन जिम्मेदार कौन?
विनोद विकट
शिवपुरी में आवारा कुत्तों के हमलों में दो दिनों के भीतर 65 से अधिक लोग घायल हो गए। मासूम बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अस्पताल पहुंचते रहे, लेकिन जिला प्रशासन, नगर पालिका और पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब शहर में लगातार हमले हो रहे थे, तब संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने और प्रभावी कार्रवाई कराने के लिए प्रशासन ने क्या ठोस कदम उठाए? यदि हालात इतने गंभीर हो गए कि दर्जनों लोग घायल हो गए, तो क्या यह निगरानी व्यवस्था की विफलता नहीं है?
नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी वर्षों से नसबंदी अभियान, नियंत्रण अभियान और संसाधनों पर खर्च के दावे करते रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर की सड़कों पर आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। यदि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि योजनाओं का वास्तविक परिणाम आखिर कहां है।
पशुपालन विभाग भी अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकता। जब शहर में लगातार हमलों की घटनाएं सामने आ रही थीं, तब विभाग द्वारा जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, निगरानी और समन्वित कार्रवाई कितनी प्रभावी रही, यह भी जांच का विषय है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस कुत्ते को पकड़ने का दावा किया गया, उसी हुलिए के कुत्ते द्वारा अगले दिन फिर लोगों को घायल करने की खबरें सामने आईं। इससे कार्रवाई की गंभीरता और विभागीय दावों की विश्वसनीयता दोनों पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
तीखे सवाल
कलेक्टर अर्पित वर्मा बताएं कि 65 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद भी संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं हुई?
नगर पालिका स्पष्ट करे कि वर्षों से चल रहे अभियानों के बावजूद शहर में कुत्तों का आतंक क्यों कायम है?
पशुपालन विभाग बताए कि खतरे की स्थिति को रोकने के लिए उसकी भूमिका आखिर कहां दिखाई दी?
यदि आज दर्जनों लोग घायल हुए हैं, तो कल किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या सरकारी विभागों का काम केवल प्रेस नोट जारी करना है या नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी?
शिवपुरी की जनता अब आंकड़े, दावे और सफाई नहीं सुनना चाहती। जनता का सीधा सवाल है—जब लोग कुत्तों से कट रहे थे, तब जिम्मेदार अधिकारी आखिर कर क्या रहे थे?
— अफसरनामा विनोद विकट
Editor-in-Chief, Indiaaajtak.in

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