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मंडियों में टैक्स चोरी और फर्जी गेटपास का खेल! शिवपुरी की जांच ठंडे बस्ते में, पिछोर प्रकरण से फिर उठे सवाल

मंडियों में टैक्स चोरी और फर्जी गेटपास का खेल! शिवपुरी की जांच ठंडे बस्ते में, पिछोर प्रकरण से फिर उठे सवाल शिवपुरी। जिले की कृषि उपज मंडियो...


मंडियों में टैक्स चोरी और फर्जी गेटपास का खेल! शिवपुरी की जांच ठंडे बस्ते में, पिछोर प्रकरण से फिर उठे सवाल


शिवपुरी। जिले की कृषि उपज मंडियों में टैक्स चोरी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए कारोबार किए जाने के मामलों ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। हाल ही में पिछोर मंडी से जुड़े मामले के सामने आने के बाद मंडी व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार कुछ माह पूर्व कृषि उपज मंडी शिवपुरी में मार्च माह के दौरान प्रतिदिन लगभग ढाई हजार बोरी प्याज और लहसुन की आवक दर्ज होने को लेकर शिकायत कलेक्टर तक पहुंची थी। शिकायत में मंडी शुल्क और कर संबंधी अनियमितताओं की आशंका जताई गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच के निर्देश दिए और एसडीएम आनंद राजावत को जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद तहसीलदार अनिल धाकड़ द्वारा जांच कराई गई, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से कई तरह की चर्चाएं बनी हुई हैं।

इधर, हाल ही में कृषि उपज मंडी शिवपुरी में करीब पांच लाख रुपये की टैक्स चोरी का मामला सामने आने के बाद मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक मामले में पिछोर मंडी से जुड़े फर्जी गेटपास और मंडी टैक्स चोरी के आरोपों ने पूरे जिले में चर्चा का विषय बना दिया है। वायरल जानकारी में बताया जा रहा है कि मामले में एफआईआर दर्ज की गई है तथा लाखों रुपये मूल्य के गेहूं से जुड़ी अनियमितताओं की जांच की जा रही है।

मंडी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि फर्जी गेटपास और कर चोरी के मामलों की निष्पक्ष जांच की जाए तो कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। करैरा और पिछोर मंडियों को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि संबंधित मामलों में आधिकारिक जांच और कार्रवाई का इंतजार है।

जिले में लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अब निगाहें मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड और संबंधित अधिकारियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। किसानों और व्यापारियों की मांग है कि मंडियों में होने वाले प्रत्येक लेन-देन और गेटपास व्यवस्था की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और राजस्व को होने वाली संभावित हानि रोकी जा सके।

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