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सिद्धेश्वर मेला विवाद: मंदिर ट्रस्ट के राजस्व पर डाका या सिस्टम की चूक?

  सिद्धेश्वर मेला विवाद: मंदिर ट्रस्ट के राजस्व पर डाका या सिस्टम की चूक? विनोद विकट | शिवपुरी Indiaaajtak.in Editor-in-Chief: Vinod Vikat द...

 सिद्धेश्वर मेला विवाद: मंदिर ट्रस्ट के राजस्व पर डाका या सिस्टम की चूक?

विनोद विकट | शिवपुरी

Indiaaajtak.in

Editor-in-Chief: Vinod Vikat

दिनांक: 02 जून 2026


शिवपुरी का प्रसिद्ध सिद्धेश्वर मेला शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही प्रशासनिक जानकारी ने मेले की स्वीकृति, धरोहर राशि और ठेका प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वायरल दस्तावेजों और प्रशासनिक दावों में सच्चाई है, तो मामला केवल नियमों की अनदेखी का नहीं बल्कि मंदिर ट्रस्ट के राजस्व को संभावित नुकसान पहुंचाने का भी बनता है।

जानकारी के अनुसार प्रशासनिक स्तर पर यह बात सामने आई है कि मेले के संचालन के लिए आवश्यक स्वीकृतियां और धरोहर राशि जमा होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं दूसरी ओर मेला संचालन से जुड़े पक्षों द्वारा अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सच क्या है और जिम्मेदार कौन है?

शहरवासियों का कहना है कि पिछले वर्ष भी सिद्धेश्वर मेले के ठेके और आय-व्यय को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, लेकिन जांच और कार्रवाई का मामला आगे नहीं बढ़ सका। यही वजह है कि इस बार भी मेले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाली राशि में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो यह सीधे-सीधे धार्मिक आस्था और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा विषय है।

नवनियुक्त कलेक्टर अरपित वर्मा (IAS) के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तथ्यों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करने की है। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय होना चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को भी आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि जनता के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त हो।

राजनीतिक गलियारों में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष लगातार नगर पालिका और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि आम नागरिक यह जानना चाहते हैं कि सिद्धेश्वर जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के मेले के संचालन में आखिर पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई जा रही।

सबसे बड़े सवाल

मेले के संचालन की अंतिम स्वीकृति किन शर्तों पर दी गई?

धरोहर राशि जमा हुई या नहीं, इसका अधिकृत रिकॉर्ड क्या कहता है?

मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाला राजस्व सुरक्षित है या नहीं?

यदि नियमों का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?

क्या पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?

शिवपुरी की जनता अब जवाब चाहती है। यदि मंदिर ट्रस्ट के हितों को नुकसान पहुंचा है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है तो प्रशासन को दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सवाल केवल एक मेले का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और मंदिर ट्रस्ट की संपत्ति की सुरक्षा का है।

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