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शिवपुरी वन विभाग में वर्षों से जमे अधिकारी-कर्मचारी, अतिक्रमण और भ्रष्टाचार पर उठ रहे सवाल

  शिवपुरी वन विभाग में वर्षों से जमे अधिकारी-कर्मचारी, अतिक्रमण और भ्रष्टाचार पर उठ रहे सवाल रिपोर्ट: विनोद विकट Editor-in-Chief, Indiaaajta...

 शिवपुरी वन विभाग में वर्षों से जमे अधिकारी-कर्मचारी, अतिक्रमण और भ्रष्टाचार पर उठ रहे सवाल

रिपोर्ट: विनोद विकट

Editor-in-Chief, Indiaaajtak.in

मो.: 09977708976

दिनांक: 07 जून 2026


शिवपुरी। मध्यप्रदेश शासन की स्थानांतरण नीति के अनुसार सामान्यतः तीन वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाना चाहिए, लेकिन शिवपुरी वन मंडल में स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। विभाग में कई अधिकारी एवं कर्मचारी वर्षों से एक ही जिले और एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहे हैं, जिससे कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय सूत्रों के अनुसार वन विभाग में डीएफओ, एसडीओ, रेंजर, डिप्टी रेंजर, बीट गार्ड तथा स्थापना शाखा के कई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहे हैं। पूर्व में वन मंडल अधिकारी के रूप में देवेश कोहली, लवित भारती, मीना कुमारी मिश्रा तथा सुधांशु यादव जैसे अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। इनमें से कई अधिकारियों का स्थानांतरण हो चुका है, जबकि कुछ अधिकारी वर्तमान में भी जिले में पदस्थ बताए जा रहे हैं।

दस्तावेजों में शिवपुरी, कोलारस, पोहरी, बदरवास, पिछोर, करैरा एवं सतनवाड़ा वन परिक्षेत्रों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं। विभागीय अभिलेखों से यह भी संकेत मिलते हैं कि कई कर्मचारी एक दशक से अधिक समय तक जिले में पदस्थ रहे, जबकि शासन की स्थानांतरण नीति का पालन प्रभावी रूप से नहीं हुआ।

वन भूमि पर अतिक्रमण, विभाग की चुप्पी पर सवाल

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा प्रश्न वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर उठ रहा है। जिले के कई वन क्षेत्रों में प्रभावशाली लोगों द्वारा वन भूमि पर कब्जा कर खेती किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। पिछले वर्ष विभाग ने कुछ बीटों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी, लेकिन वर्ष 2026 में ऐसी कोई बड़ी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन क्षेत्रों में वन भूमि पर कब्जे की शिकायतें वर्षों से लंबित हैं, वहां विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बढ़ रहे हैं और वन संपदा को लगातार नुकसान पहुंच रहा है।

जंगलों में आग और अवैध कटाई पर भी चिंता

गर्मी के मौसम में जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों से आग लगने की घटनाओं की सूचनाएं मिलती रही हैं। वहीं कई स्थानों पर हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई की शिकायतें भी सामने आई हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी निगरानी नहीं की गई तो वन क्षेत्र और वन्यजीव दोनों प्रभावित होंगे।

बाउंड्री वॉल और प्लांटेशन कार्यों में अनियमितताओं के आरोप

वन विभाग द्वारा कराए जा रहे बाउंड्री वॉल निर्माण, पौधारोपण (प्लांटेशन) तथा संरक्षण कार्यों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई कार्यों में गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता की जांच आवश्यक है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना अभी बाकी है।

जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर प्रश्न

वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लंबे समय से एक ही जिले में पदस्थ रहने के मामले में भोपाल स्थित वन मुख्यालय तथा ग्वालियर सर्किल कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि शासन की स्थानांतरण नीति प्रभावी है तो फिर वर्षों से जमे अधिकारियों और कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही, यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि शिवपुरी वन मंडल में वर्षों से पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची की समीक्षा कर शासन की स्थानांतरण नीति के अनुरूप कार्रवाई की जाए। साथ ही वन भूमि अतिक्रमण, अवैध कटाई, जंगलों में आग की घटनाओं तथा प्लांटेशन और निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि वन संपदा के संरक्षण और विभागीय पारदर्शिता को सुनिश्चित किया जा सके।

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